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जयपुर के लोकप्रिय त्योहार


जयपुर में मेलों और त्यौहारों विशेष परंपराओं के प्रदर्शन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जयपुर शहर का एक सच है शहर साल के अलग अलग त्योहारों को अलग अलग समय पर खूब धूम धाम से मनाते है । जयपुर में मेले और त्यौहार बड़े ही रंगीन तरीको से मनाए जाते है जो जयपुर शहर के लोगो की सच्चे सांस्कृतिक सम्पन्नता की अनुभूति करवाता है ।

गणगौर महोत्सव

गणगौर जयपुर में सबसे अधिक उत्साह से मनाया जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह चैत्र माह में आता है , जो मार्च और अप्रैल के बीच आता है  (हिंदू कैलेंडर के अनुसार) में मनाया जाता है।गणगौर मुख्य रूप से महिलाओं और लड़कियों, जो अपने पति की लंबे जीवन की प्रार्थना के लिए 16 दिन तक पूजा की जाती है । गणगौर की पूजा में मिट्टी के भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है कंवारी लड़कियां तो इसकी पूजा अच्छे वर के लिए करती है और सुहागन औरते अपने पति की लम्बी उम्र के लिए करती है । जयपुर में गणगौर की सवारी निकली जाती है। एक भव्य परेड प्रस्तुत की जाती है  सिटी पैलेस से लेकर  जननी-ड्योढ़ी  से होते हुए फिर त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार, चौगान स्टेडियम से होते हुए  और अंत में तालकटोरा के पास पूरी होती है। इस परेड में लोक कलाकारों द्वारा हाथियों, पुरानी पालकी, बैलगाड़ी, रथ और शानदार प्रदर्शन प्रस्तुत किया जाता है । 

तीज महोत्सव

जयपुर के रहन सहन का सबसे अच्छा उदाहरण है तीज महोत्सव। जयपुर में हर किसी के चेहरे पर मुस्कान और त्यौहार मनाने का उत्साह देखने को मिलता है। ऐसा लगता है कि जयपुर  त्यौहार उमंग  उल्हास लेकर आते है। यही कारण हे कि जयपुर में त्यौहार मनाने के लिए लोग बहुत दूर-दूर से आते है। ऐसा ही एक जीवन्त उदाहरण तीज का त्यौहार है। 

शहर में तीज माता की सवारी इस बार भी पारंपरिक और शाही ठाठ से निकाली जाएगी। त्रिपोलिया गेट से शुरू होकर त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार होते हुए चौगान स्टेडियम पहुंचेगी। सवारी के जुलूस में बग्धी, बैलगाडियां, ऊंट और तोप गाडियां भी शामिल होती है। तीज माता पार्वती का एक रूप है और जयपुर के शाही परिवार की महिलाओं के अलावा अन्य कोई तीज की मूर्ति को  नहीं सजा सकता है। इस सवारी को स्वर्ण या रजत पालकी में रखा गया है। यह उच्च नस्ल के घोड़ों, हाथियों और पराक्रम के रेगिस्तान में ऊंट के जहाज सहित एक शाही काफिले में शामिल होते है।  लोक नृत्य, लोक गीत और अन्य विभिन्न कार्यकर्म आयोजित किये जाते है । इस सवारी में जयपुर के सर्वश्रेस्ट कलाकार लोक सगीत प्रस्तुत करते है ।

मकर संक्रांति

जयपुर के सभी लोग पतंग उड़ाने के शौकीन होते है। पतंग महोत्सव  मकर सक्रांति के एक महीने पहले जनवरी से ही पतंग उड़ने लग जाती है। पुरे परिवार के लोग एक साथ मिल कर पतंग उड़ाते है एक दूसरे की पतंग काटते है । दूसरे देश के लोग पतंग उत्सव में शामिल होते है उनके साथ प्रतिस्पर्धा  है। महोत्सव के अंतरगत बहुत सारी प्रतियोगिताए आयोजित की जाती है। अंतरास्ट्रीय पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह अंतरास्ट्रीय उत्सव 3 दिन तक चलता है ।  पूरा आसमान पतंगो से भरा हुआ होता है। अँधेरा हो जाने पर भी लोग रौशनी वाली पतंग उड़ाते है। चारो तरफ  माहौल खुशी से भरा होता है। रात को पटाखे और लालटेन चलाए जाते है ।

हर साल मकर सक्रांति 14जनवरी को मनाई जाती है जयपुर वाले सभी सर्दी में जल्दी उठ कर पतंग उड़ाते है और लेट नाईट  तक वो काफी एन्जॉय करते है

हाथी महोत्सव

हाथी महोत्सव एक और वार्षिक उत्सव है जो की फाल्गुन पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है, जो फरवरी और मार्च के बीच आता है। उत्सव में ऊंट, घोड़े और लोक नर्तकों के साथ हाथियों के एक भव्य जुलूस का आयोजन किया जाता है। हाथियों  के ऊपर खूबसूरत चित्रकारी की जाती है, काठी कपड़ा, आभूषण और अन्य आकर्षक सामान के साथ सजाया जाता है। सबसे खूबसूरती से सजाया गए हाथी को सम्मानित किया जाता है। इस उत्सव के अन्य आकर्षण हाथी पोलो, हाथी दौड़, हाथी नृत्य, 10 लोगों के एक समूह के खिलाफ एक हाथी के युद्ध प्रतियोगिता रखी जाती है। और हाथी  पीठ के  ऊपर बैठ  कर होली भी खेली जाती है।

जयपुर के लोग सभी मेलों और त्योहारो में खूब आनंद लेते है। ये उत्सव  जयपुर के (वास्तव में, भारत के) विविध संस्कृति, परंपराओं, पहनावे, मनोरंजन, व्यंजनों और आतिथ्य के साथ सभी त्योहारों को बेजोड़ उत्साह के साथ मनाये जाते है । सब मिल कर सभी लोग सारे त्यौहार मनाते है चाहे उनकी जाति धर्म, कुल कुछ भी हो ।

 


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