MENU X
जयपुर के ब्रिगेडियर एच.एच. महाराजा सवाई भवानी सिंह


ब्रिगेडियर एच.एच. महाराजा सवाई भवानी सिंह 24 जून 1970 से 28 दिसम्बर 1971 तक जयपुर के महाराजा रहे। फिर इसके बाद उन्होंने भातीय सेना में सेवा की और उनको महावीर चक्र से पुरस्कारित किया गया था । उनको ब्रिगेडियर के पद से उनकी स्वेच्छा उनकी सेवानिवत्ति के बाद सम्मानित किया गया था । वो आजादी के बाद भट के सबसे आमिर राजाओ में से एक थे । उनका निधन गुड़गांव, हरियाणा के एक निजी अस्पताल में 17 अप्रैल 2011 में उनके शरीर के कई अंग खराब होने के कारण हो गया था ।

महाराजा सवाई भवानी सिंह का जन्म

महाराज भवानी सिंह जी 22 अक्टुम्बर 1931 को महाराजा सवाई मान सिह द्वितीय और उनकी पहली पत्नी महारानी मरुधर कंवर देवी साहिब जो जोधपुर के महाराजा की बेटी थी के पैदा हुए थे । जयपुर में कई पीढ़ियों से पुरुष वारिस का जन्म हुआ था और जयपुर के जितने भी महाराजा हुए थे उनको गोद लेकर महाराजा बनाया । कहा जाता है कि जब भवानी सिह जी का जन्म हुआ था तब बहुत बड़ा समारोह आयोजित किया गया था उस समारोह में बहुत सारी शैपेन की बोतले खुली थी तो चारो तरफ बुलबुले हो गए थे तो महाराज ने भवानी सिह जी का उप नाम "बुलबुले" रख दिया था । 

महाराजा सवाई भवानी सिंह की शिक्षा

उन्होंने बाग स्कुल, श्रीनगर और दून स्कुल देहरादून में अपनी प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की थी ।  बाद में उन्हें ब्रिटेन में हैरो स्कूल के लिए भेजा गया था।

सवाई भवानी सिंह का सिहासन

सवाई भवानी सिंह जी अपने पिता महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय की असामयिक दुर्धटना में मृत्यु के बाद 24 जून, 1970 को जयपुर की गद्दी पर बैठे थे। उन्होंने महाराजा का ख़िताब भारत के सविधान के 26 वे संशोधन में समाप्त कर दिया था । 1971 में सभी रियासतों के विशेषाधिकार प्राप्त कर चुके थे । जयपुर के महाराजा ब्रिगेडियर महामहिम सरमद-ए- राजः हिंदुस्तान राज रेजेंद्र श्री महाराजशिराज महाराज सवाई श्री भवानी सिह बहादुर उनके आधिकारिक शीर्षक के रूप में निम्नानुसार थे।

महाराजा सवाई भवानी सिंह के परिवार का जीवन

महाराजा सवाई भवानी सिंह जी ने सिरमूर की राजकुमारी पद्मनी देवी से 10 मार्च 1966 को दिल्ली समारोह में शादी कर ली । महारानी पद्मनी देवी राजेंद्र प्रकाश बहादुर की बेटी थी उनका नाहन में एक राज्य शासन था । महारानी की माँ महारानी इंदिरा देवी महारानी के पिता की पहली पत्नी थी । 

महाराजा सवाई भवानी सिह और महारानी पद्मनी देवी के एक ही बच्चा हुआ था वो थी "राजकुमारी दिया कुमारी "। राजकुमारी दिया कुमारी का जन्म 30 जनवरी 1971 को हुआ था

महाराजा सवाई भवानी सिह ने बाद में अपनी बेटी के बड़े बेटे पद्मनाभ को 2002 में गोद लिया था जिससे वो उनका उत्तराधिकारी बन सके ।

अपने प्रेरणादायक सेना कैरियर

उन्होंने भारतीय सेना में सेवा की थी और अपना प्रेरणादायक कॅरियर बनाया था महाराजा सवाई भवानी सिह के करियर के बारे में कुछ प्रमुख विवरण इस प्रकार है।

सन

विवरण

1951

में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में 3 केवलारी  रेजिमेंट में भारतीय सेना में कमीशन

1954

में राष्ट्रपति के अगरक्षको के  लिए चयनित किये गए

1954-1963

राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के रूप में सेवा

1963 50वें पैरासूट बिर्गेड में तैनात किया गया था
जनवरी  1964-1967 एडजुटेंट के रूप में सेवा, देहरादून के भारतीय सैन्य अकादमी में
1967 में सेकंड इन कमांडो बने 10वें पैरासूट रेजिमेंट के, जो दो अभिजात वर्ग विशेष बल बटालिनों में से एक है 
1968 में 10 वीं पैराशूट रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) बन गया
1970 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के प्रारंभ से पहले प्रशिक्षण 'मुक्तिवाहिनी' में मदद की
1971 में भारत पाक युद्ध में 10 वें पैरासूट रेजिमेंट के पेराकमांडो की आज्ञा दी और सिंध में छाछरो पर  कब्जा किया इसलिए इनको दूसरे सर्वोच्च वीरता  पुरस्कार  "महावीर चक्र " से सम्मानित किया गया
1972 स्वैच्छिक से सेवानिवृत्ति ले ली
1974 'ऑपरेशन पवन' के दौरान (तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के अनुरोध पर) श्रीलंका गए थे 10 वीं पैरा की अपनी पुरानी इकाई का मनोबल बढ़ाने में सफल हुए है  । तब इनको ब्रिगेडियर की रैक से सम्मानित किया गया था । सेवानिव्रत होने के बाद इनको ये दुर्लभ रैक प्राप्त हुई ।

भारतीय सेना से सन्यास लेने के बाद भी ब्रिगेडियर एच.एच. महाराजा सवाई भवानी सिंह जी ने 1993 से लेकर 1997 तक पहले उच्चायुक्त निवासी ब्रुनेई के राज्य के रूप में कार्य किया ।

अपना राजनीतिक जीवन

उनकी दिवंगत सौतेली माँ गायत्री देवी जो उनके पिता की तीसरी पत्नी थी वो भी राजनीती में शामिल थी । सवाई भवानी सिंह जी में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे उन्होंने सन 1989 लोक सभा चुनाव में हिस्सा लिया था लेकिन उन्होंने भाजपा नेता गिरधारी लाल भार्गव को खो दिया था । उसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीती से सन्यास ले लिया था ।

महाराजा सवाई भवानी सिंह - आजादी के बाद सबसे अमीर भारतीय महाराजा थे

महाराजा सवाई भवानी सिंह जी अपने पिता के नक़्शे कदम पर चलते हुए उन्होंने अपने महलो को होटल में बदल दिया । उन्होंने भारत का पहला होटल व्यवसाय शुरू किया । उन्होंने लक्जरी होटलो का निर्माण किया 1958 में उन्होंने राज पैलेस व् अन्य पूर्व शाही निवास को होटल में बदला दिया  था । एक होटल रामबाग पैलेस भी था वो भारत के महाराजाओ में सबसे अमीर महाराजा में से एक जाने जाते थे और फिर देश को स्वतन्त्रता प्राप्त हुई ।

मौत

महाराजा सवाई भवानी सिंह जी को 20 मार्च, 2011 गुड़गांव, के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था । उनके कई अंग खराब हो गए थे इस वजह से 17 अप्रैल, 2011 को हॉस्पिटल में ही उनका निधन हो गया था ।  महाराजा सवाई भवानी सिंह जी अपनी मृत्यु के समय 79 साल के थे । उनका पार्थिक शरीर जयपुर लाया गया जयपुर के सिटी पैलेस में उनको अंतिम सम्मान दिया गया । इसके बाद उन्हें गैटोर की छतरियां  जो जयपुर के शाही परिवार की शाही अंतिम संस्कार स्थल है । 18 अप्रैल, 2011 को महाराजा का अंतिम संस्कार किया गया था ।

उनकी मौत के बाद उनके दत्तक पुत्र को जयपुर के महाराजा का ताज पहनाया गया था ।

 


You May Also Like

Art lovers can gear up for the Cartist Automobile Art Festival 2017, which is going to start from 12th April.

On the occasion of World Heart Day, September 29, check out what's good for your heart health and what's not!

Dancers from Jaipur city are earning fame in Mumbai. And they can be seen practicing in parks, just like, dancers in Mumbai are seen practicing on beaches.

The numbers when studied revealed a clear raise of 3223 cancer patients in the country.

The Rajasthan Tourism Department is set on work to make the most out of the state’s tourism potential.