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मोती डूंगरी: भगवान गणेश का मंदिर


जयपुर एक धार्मिक शहर है यहाँ के पवित्र मन्दिरों की ऐतिहासिक और सास्कृतिक जड़े मजबूत है जो यहाँ की भक्ति को प्रदर्शित करता है । सभी मंदिरों और पवित्र स्थानों के बीच मोती डूंगरी बहुत ही उल्लेखनीय है । यह एक अद्भुत कलात्मक मन्दिर है जिसे लोग देखे बिना नही रह सकते है । इस मंदिर की शानदार वास्तुकला है और मंदिर की नक्काशियां चौकाने वाली है जो हमेशा सुर्खियों में रहती है । मोती डूंगरी गुलाबी शहर का सबसे आकर्षक धार्मिक स्थल है । जो दर्शको को अपनी और आकर्षिता करता है। यह भगवान गजानंद का मंदिर अपनी दिव्य शक्ति के लिए बहुत लोकप्रिय है। मंदिर की स्थापत्य कला जयपुर की समृद्ध और सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।

यह मंदिर हमेशा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है इस मंदिर को देखने आर्किटेक्ट और विद्वान आते है । यहाँ पर अन्नकूट जन्माष्टमी के त्यौहार पर बनाया जाता है और मंदिर में पौषबड़ा का प्रसाद भी पौष माह में बनाया जाता है । बड़े पैमाने पर यहाँ पर श्रद्धालु आते है और प्रसाद लेते है । लोग इस समारोह की तैयारी में भाग लेते है । हजारो लोग मंदिर में अलग-अलग स्थानों से आते है भगवान गणेश के दर्शन करते है और इस समारोह का आनंद लेते है । हर बुधवार को लोग यहाँ दर्शन करने के लिए आते है और श्रद्धालु यहाँ रोज दर्शन करने आते है । बुधवार को दर्शन करने का समय सुबह 5:00 से दोपहर 1:30  तक फिर उसके बाद मंदिर बंद हो जाता है उसके बाद शाम 4:30 बजे से रात के 9:30 बजे तक मंदिर खुला रहता है । वहाँ पर किसी प्रकार का प्रवेश शुल्क नहीं है लोग अपनी श्रद्धा से आते है और लाल कपड़े, अटूट चावल, सिंदूर और पीले लड्डू भगवान गणेश को चढ़ाते है ।  

गणेश मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का18 वीं सदी में सेठ जय राम पालीवाल द्वारा निर्माण किया गया था । यह भगवान गणेश की मूर्ति की वजह से विदेशी पर्यटकों का प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक बन गया है । मूर्ति आसन पर है और उनकी मूर्ति पर सिंदूर लगा हुआ है और सूंड पर चाँदी का कवर बहुत ही शुभ माना जाता है । वहाँ पर संगमरमर के पत्थर से मूषक राजा की मूर्ति लोगो के आकर्षण का केंद्र है ।

गणेश मंदिर की वास्तुकला

मन्दिर की दीवारों को सोने और चांदी से सजाया गया है और पौराणिक छवियों की नक्काशियां की गई है । इस दिव्य जगह से लोग प्रेरित होते है और लोगो में सकारात्मकता भर्ती है । यह मंदिर माँ दुर्गा और श्री कृष्ण के मंदिर के पास स्थित है । लोग मन की शान्ति पाने के लिए ऐसी अद्भुत जगह पर आते है ।

मंदिर की यात्रा करने का समय

हम आसानी से मोती डूंगरी पहुच सकते है । क्योकि यहाँ पर शहर के किसी भी स्थान से आसानी से पहुचा  जा सकता है। आप किसी भी दिन यहाँ पर आ सकते है । यह मंदिर दोपहर के तीन घण्टे बंद रहता है 1:30 से शाम 4:30 तक

यहाँ पहुचने के लिए क्या करें

वैसे यहाँ पर आने के लिए सभी जगह से बसे मिल जाती है आप यहाँ पर आसानी से पहुच सकते हो

एयरपोर्ट के माध्यम से टैक्सी या ऑटो

हवाई अड्डे से दूरी जवाहर लाल नेहरू मार्ग (जेएलएन मार्ग के माध्यम से) के माध्यम से 9.6 किलोमीटर दूर है।
टैक्सी या एक तरफ का ऑटो का किराया ऑटो से मोती डुगरी लिए 25 - 30 मिनट का समय लगेगा
एक तरफ का ऑटो का किराया 100 - 120 भारतीय रूपये
एक तरफ का ऑटो का किराया 120 - 140 भारतीय रूपये

 

सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से

बस सेवा मोती डुगरी के लिए उपलब्ध है ।

आप ऑटो लेकर जवाहर सर्किल तक पहुच सकते है 3AC बस आप को छोटी चौपड़ तक ले जायेगा यह वहा 1.4 किमी एसएमएस हॉस्पिटल छोड़ देगा फिर आप ऑटो ले कर 10 मिनट में वहाँ पहुंच सकते है ।

यहाँ से मोती डुगरी पहुचने मै 60 - 70 मिनट का समय लगेगा ।

टिकट और जानकारी के लिए फ़ोन करे (+91 141 223 3509 )

रेलवे स्टेशन के माध्यम से टैक्सी या ऑटो

रेलवे स्टेशन से दूरी (भवानी सिंह रोड के माध्यम से) 5.6 किमी दूर है।

टैक्सी या ऑटो से मोती डुगरी के लिए 25 - 30 मिनट का समय लगेगा ।

एक तरफ का किराया ऑटो का 90 - 120 भारतीय रूपये ।

एक तरफ का किराया का 120 - 140 भारतीय रूपये ।

पार्किंग सूचना

उपलब्ध पार्किंग

प्रभार - नि: शुल्क (सड़क की ओर)

 


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