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जयपुर से बेस्ट सप्ताहांत गेटवे


जयपुर शहर एक खूबसूरत शहर है। इस शहर की शाही विरासत और वास्तुकला, राजसी किलों और महलों, जीवंत संस्कृति और जीवन शैली और दीवारों शहर के गुलाबी लाल रंग सुंदरता के लिए जाना जाता है। जबकि शहर के कुछ ही किमी की दुरी पर और भी घूमने की अच्छी जगहें है जयपुर से 30 से 300 किलोमीटर की दुरी के अंदर ही बहुत से सुन्दर स्थल है। जयपुर के पास सबसे अच्छे अवकाश स्थल पर जाइये और थोड़े पैसे खर्च कीजिये।

जयपुर से एक घंटे की ड्राइव के भीतर

चोमू

यह जयपुर से मात्र 33 किमी की दुरी पर है। चौमू जयपुर की एक ऐतिहासिक विरासत है। यह जयपुर के NH11 के माध्यम से जाने पर यहां का सफर सिर्फ 55 मिनट लगते है यहाँ पर सबसे अधिक 300 साल पुराना चौमू पैलेस है जो आजकल एक होटल के रूप में जाना जाता है। यह होटल एक ऐतिहासिक है यह उस समय के राजपूत राजाओं की भव्य जीवन शैली को दर्शाता है और यह सारी आधुनिक सुविधाएं प्रदान करता है। जब आप चौमू शहर में घूमने जायेगे तो यहां के बाजार और यहां रहने वाले लोगो का रहन सहन और उनका जीवन जीने का तरीका देख सकते हो और आप यहां पर ऊंट की पीठ पर बैठ कर राजस्थान की विशेष ख़ुशी का आनंद ले सकते हो और यहां का दाल बाटी चूरमा खा सकते हो।

चोमू पैलेस होटल

बगरू

जयपुर के दक्षिण पश्चिम की दिशा में 35 किमी की दूरी पर बगरू है जो एक कपड़ा गाँव के लिए जाना जाता है। यह जयपुर से एक घण्टे की दुरी पर है यह जयपुर-अजमेर रोड पर स्थित है। बगरू सबसे अच्छा अपने हाथो से बना हुआ हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता है। ज्यादातर इन हथकरघा के डिजाइन सरल और गंवई रंग में हैं। यहां का प्रिंट लोकप्रिय बगरू प्रिंट के रूप में जाना जाता है। यहां पर भी आप किले और गाँव की तरफ यात्रा कर सकते है। 

बगरू प्रिंट

रामगढ़

यह जयपुर से 28 किमी की दुरी पर है रामगढ़ जयपुर के स्थानीय लोगो का एक पसंदीदा जगह है। आप जयपुर-दिल्ली रोड के माध्यम से एक घण्टे की दुरी में पहुँच सकते है। रामगढ़ का सुंदर परिदृश्य और यह एक आदर्श पिकनिक स्थल बन सकता है। यहां पर विशेष रूप में आप मानसून के मौसम में घूमने आ सकते हो।

रामगढ़ की कृत्रिम झील

यहां पर जमवाय माता का मंदिर और पुराना किला है जो कछावा राजपूतो के द्वारा पहली बार दर्शाया गया था। यहां से आप आमेर जा सकते हो वहां पर दो अन्य खण्डर और है। जयपुर के शाशको ने इस जगह को शिकार के कमरे के रूप में इस्तेमाल किया था। इस जगह को आज ताज होटल समूह द्वारा शाही जगह में तब्दील कर दिया गया है तो यह रहने लायक बन गया है। आप रामगढ़ की एक अच्छी सैर करने के बाद एक ही दिन में वापस लोट सकते है।

माधोगढ़  - जयपुर शहर में सप्ताह के अंत गंतव्य

जयपुर शहर से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर यह स्थान माधोगढ़ जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग 11 (NH11) पर स्थित है। यहां पर आप सप्ताह के अंत में जाने की योजना बना सकते है आप अपने परिवार के साथ कही जाना चाहते है और आपको ऐतिहासिक स्थानों को देखने का मन कर रहा है तो आप माधोगढ़ जा सकते है ये आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।


माधोगढ़ फोर्ट

माधोगढ़ में देखने के लिए स्थान युद्ध तुंगा के 'मैदानों :

माधोगढ़ की आप यात्रा करेगे तो आपको यहां पर बहुत घने जंगल देखने को मिलेंगे और यहां पर खेत है जिसमे एक बार लड़ाई हुई थी यह युद्ध तुंगा युद्ध के लिए जाना जाता है।

जयपुर से 1-2 घंटे की ड्राइव के अंदर

सामोद

सामोद जयपुर शहर से 41. 3 किमी की दुरी पर है जयपुर-सीकर रोड के माध्यम से 1 घण्टे 10 मिनट में पहुँच सकते है यह बहरी इलाको में छोटा सा एक गाँव है। यह जगह दैनिक दिनचर्या में घूमने के हिसाब से बहुत अच्छी है आपको यहां घूमकर अच्छा लगेगा।

सामोद में सुंदर समोद हवेली, बाग और पैलेस के लिए मुख्य रूप से प्रसिद्ध है। सामोद पेलेस जो 16 वी सदी में बनाया गया था पर्यटकों के लिए इसका पुनर्निर्माण किया गया है| आप यहा पर राजपूत वास्तुकला और मुगल सजावट का एक सा ही मिश्रण देख सकते है | यहा पर सामोद बाग़ है | यह बाग़ 20 एकड़ शेत्र में फैला हुआ हें यहा पर मुगल शेळी में बगीचे लगाये हुए हें इसमें फव्वारे भी हें |

सामोद 

सामोद एक ऐतिहासिक धरोवर है इसके तीन प्रमुख हिस्सो को होटल बना दिया गया है। जबकि आप अगर महल में रहने के लिए जाओगे तो आपको एक शाही अनुभव प्रदान होगा। यहां पर आप सप्ताह के अंत में आकर रोमांटिक सप्ताह बिता सकते है। आप जयपुर से एक दिन की यात्रा करने के लिए सामोद को चुन सकते है। इसके अलावा यहां पर वीर हनुमान मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है।

सामोद हवेली

दौसा

दौसा जयपुर से 60 किमी की दुरी पर है यहां पर जाने के लिए आपको 1 घण्टा और 20 मिनट लगेंगे यह जयपुर-आगरा मार्ग पर स्थित है। दौसा में भी काफी ऐतिहासिक चीजे है जिनको देखने के लिए आप यहां की यात्रा कर सकते है। यहां पर प्रमुख आकर्षित जैसे माताजी का मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर और कुछ और मंदिरों में भगवान शिव का मंदिर है

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर

दौसा में दिग्गज मेहदीपुर बालाजी का मंदिर है जो भारत का एक धार्मिक स्थल है यहां पर भूत भगाने के द्रश्य को आप अपनी आखों से देख सकते हो। इस मंदिर को बुरी आत्माओ से भरा होने के लिए जाना जाता है। जबकि कुछ लोगो का मानना है कि भूत भगाने का द्रश्य यहां देखा जाता है दूसरी जगह नही। फिर भी हजारों श्रद्धालु इस मंदिर में अपने प्रियजनों को बुरी आत्माओं और भूतों के कब्जे से मुक्त कराने  के लिए हर दिन की यात्रा करते है।

सांभर

जयपुर से सांभर 70 किमी की दुरी पर है यहां पर जाने के लिए आपको 1 घण्टा और 24 मिनट का समय लगेगा सांभर झील को नमक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण झील के रूप में जाना जाता है। यहां पर इसके अलावा पवित्र देवयानी टैंक, महल के पास नलियासर में पुरातात्विक खुदाई और  शाकम्बरी  मंदिर इस जगह के अन्य आकर्षक केंद है। आप यहां पर आकर बहुत सारे पक्षियों को देखने का आनंद प्राप्त कर सकते है।

सांभर झील

बैराठ विराटनगर के रूप में जाना जाता है

बैराठ जयपुर के जयपुर-शाहपुरा-अलवर रोड के माध्यम से 86 किमी की दुरी पर है यहां पर पहुचने के लिए 1 घण्टा 45 मिनट का समय लगेगा। यह जगह धार्मिक यात्रा के रूप में घूमने के लिए अच्छा विकल्प है यहां पर एक परिपत्र बौद्ध मंदिर है, जो भारत की प्राचीनतम ज्ञात संरचनात्मक मंदिर माना जा रहा है इसकी खुदाई में घरों के अवशेष मिले है। यहां पर कई बौद्ध मठों और जैन मंदिर भी है।

एक परिपत्र बौद्ध मंदिर की खुदाई अवशेष

इसके अलावा बैराठ मौर्यों, मुगलों और राजपूतों के समय में धार्मिक  कलाकृतियों के लिए भी जाना जाता था। इस जगह के कुछ अन्य आकर्षक केंद है खूबसूरत मुगल गार्डन, अशोक के शिलालेख और चित्रित छतरियों और दीवारों जहांगीर द्वारा निर्मित शामिल हैं। इस जगह का बहुत गहरा ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। महाभारत में बैराठ के बारे में लिखा गया था। यह वह जगह है जहां पर पांडवो ने 'अज्ञातवाद ' के दिन बिताये थे (वो यहां पर एक वर्ष रहे थे)

बैराठ में अक्सर प्रसिद्ध बाणगंगा मेला भरता है यह कही न कही अप्रेल-मई के बीच वैशाख की पूर्णिमा के दिन भरता है

आभानेरी

यह जयपुर से 80 किमी की दुरी पर है आभानेरी एक छोटा शहर है यहां पर जाने के लिए जयपुर-आगरा रोड से  NH11 के माध्यम से 1 घण्टा 50 मिनट का समय लगता है। यहां पर बहुत अच्छा हर्षत माता का एक प्रसिद्ध मंदिर है जो 8 वी शताब्दी में बनाया गया था यह मंदिर चाँद बावड़ी की बावड़ी के लिए जाना जाता है। चाँद बावड़ी 13 मंजिल की है और इसमें 3500 सीढ़िया है यह भारत की सबसे गहरी और सबसे ज्यादा सीढ़ियों वाली बावड़ी के लिए जानी जाती है। यह राजस्थान की सबसे बेहतरीन बावड़ियों में से एक है। आभानेरी में जैन मंदिर के घर भी है।

हर्षत माता टेम्पल, आभानेरी 

आभानेरी गांव में चाँद बावड़ी 

जयपुर से 2-3 घंटे की ड्राइव के अंदर घूमो

सीकर

सीकर जयपुर से 114 किमी की दुरी पर है सीकर जाने के लिए आगरा-बीकानेर रोड या जयपुर-झुंझुनूं बाईपास रोड से होकर जाने में 2 घण्टे और 5 मिनट का समय लगता है। सीकर शेखावत राजपूतो का सबसे बड़ा ठिकाना है यहां पर शेखावत राजपूतो के द्वारा शाषित विशाल ऐतिहासिक कला, संस्कृति और धन का केंद्र होने के लिए जाना जाता है। सीकर सुंदर बस्ती मुगल-युग वास्तुकला, महलों और स्मारकों की विशेषता रंगीन हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। सीकर में आकर्षक केंद्रों में से सीकर किला, श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, रानी महल और माधो निवास कोठी भी शामिल हैं।

माधो निवास कोठी

शिवाड़

शिवाड़ जयपुर से 110 किमी की दुरी पर स्थित है यह सवाई माधोपुर का एक छोटा सा गाँव है यहां पर जाने के लिए 2 घण्टे 10 मिनट का समय लगता है। शिवाड़ में मुख्य रूप से शिवाड़ मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित एक मकान है। यह प्राचीन 'धुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग' मंदिर  देवगिरी हिल्स के आसपास के क्षेत्र में स्थित है। 'धुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग' मंदिर इस धरती पर 12 वा ज्योतिर्लिंग मंदिर है इसका जिक्र शिव पुराण में भी किया गया है। मन्दिर के बगल में एक छोटा सा प्राचीन किला है जो यहां के स्थानीय लोगो के लिए एक अच्छा पिकनिक स्पॉट बना हुआ है |

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर

अजमेर

अजमेर जयपुर से 139 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर पहुचने के लिए 2 घण्टे और 24 मिनट लगते है। अजमेर शहर दरगाह सरीफ की वजह से काफी प्रसिद्ध है लोग यहां पर यात्रा करने आते है। सदियों पहले, वहाँ एक समय में जब अजमेर किंवदंती पृथ्वीराज चौहान, जिनकी शौर्य और वीरता के बारे में अभी भी बात की जाती है उनके नाम से जाना जाता था। और अब, सैकड़ों वर्ष के बाद यह शहर हिन्दू और मुस्लिम के धार्मिक स्थान के रूप में जाना जाता है।

दरगाह शरीफ में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की मजार (और आमतौर पर ख्वाजा साहब या ख्वाजा गरीब नवाज के रूप में जाना जाता है) यह  13 वीं सदी में बनाया गया था। यह कहा जाता है कि जब मुगल सम्राट अकबर 13 साल के थे तब से ही वो हर साल यहां पर आते थे इसलिए उनके लिए ये दरगाह बनाई गई थी। अपने पवित्र जीवन में लोग वहां पर घूमने और आशीर्वाद लेने आते थे। यह माना जाता है कि इस दरगाह में जाने से आप के मन में जो इच्छा होती है उसके लिए आप सच्चे मन से दुआ करते है तो वो पूरी हो जाती है।

आना सागर लेक

 

आना सागर लेक

आप आसानी से अजमेर सरीफ दरगाह में प्रार्थना कर सकते है और एक ही दिन में जयपुर लोट सकते है आपको यहां घूमकर आने में एक दिन का समय लगेगा। हालाँकि आप सप्ताह के अंत में वहां पर जाओ और वहां रुकना चाहो तो कोई बुरा विचार नही है। एक और दिन का समय आप उधार ले लो तो आप यहां पर अकबर का किला भी घूम सकते है जो अब एक संग्राहलय में बदल दिया गया है। यह भी अजमेर शहर में आकर्षण का केंद है यहां पर मुगलों और राजपूतों की मूर्तियां और कवच का प्रदर्शन किया गया है। और आप यहां पर आकर्षक कृत्रिम आना सागर झील को भी देख सकते है जो 12 वी सदी में बनाई गई थी और यहां पर तारागढ़ किला है।

तारागढ़ फोर्ट

तारागढ़ फोर्ट

सरिस्का बाघ उधान

यह जयपुर से 121 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर जाने के लिए आपको 2 घण्टे 45 मिनट का समय लगेगा। सरिस्का बाघ उधान राजस्थान के अलवर जिले में स्थित एक भारतीय राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य है। अरावली की सुरम्य घाटी में 765.80 वर्ग किमी बिखरा हुआ है। अलग-अलग तरह के बहुत सारे जंगली जानवर यहां पर आते है। यहां पर रहने वाले जानवरो के नाम है बाघ, सांभर, तेंदुआ, नील गाय, स्वर्ण सियार, चीतल, मोर के बहुत सारे प्रकार, चौसिंगा, जंगली सूअर के रूप में मेजबान और भारतीय ईगल उल्लू आदि जानवर है। यहां पर सबसे अच्छा समय यात्रा करने के लिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक का होता है। यहां पर यात्रा करने के लिए जीप और सेंटर किराये पर उपलब्ध है।

एक बाघ सरिस्का टाइगर रिजर्व में देखा

सही मायने में यह नेशनल उद्यान के किनारे बनाया गया सरिस्का पैलेस है जो सरिस्का की अपनी यात्रा के लिए एडिनबर्ग के ड्यूक के सम्मान में महाराजा जय सिंह द्वारा एक शाही शिकार लॉज के रूप में बनाया गया है। अब यह एक उत्कृष्ट होटल के रूप में बदल दिया गया है जहां पर आप सप्ताह के अंत में यात्रा करने आते है तो आप यहां पर रुक भी सकते है। इसके अलावा आप यहां पर नीलकंठ और नाल्देश्वर मंदिर की यात्रा भी कर सकते हो।

सरिस्का पैलेस

पुष्कर

पुष्कर एक शांत शहर है जो जयपुर से 145 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर जाने के लिए आपको अजमेर-जयपुर एक्सप्रेस के माध्यम से 2 घण्टे 40 मिनट का समय लगेगा। यह तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा, पुष्कर एक सुरम्य झील और कई मंदिर है।  इस जगह का सबसे प्रसिद्ध मंदिर ब्रह्मा मंदिर है जो पुरे भारत में ब्रह्मा जी का एक ही मंदिर है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक 'हंस ' बना हुआ है जो भगवान ब्रह्मा का दिव्य वाहक है और एक सूंदर प्रतिमा है।

ब्रह्मा मंदिर - केवल भारत में मंदिर में भगवान ब्रह्मा को समर्पित

पुष्‍कर झील, चारों तरफ से लगभग 300  मंदिरों और 52 घाटों ( जो झील के किनारों पर एक श्रृंखला में स्थित हैं ) से घिरा हुआ है। जहां श्रृद्धालु पवित्र स्‍नान करते हैं। यह एक धारणा है कि अगर कोई व्‍यक्ति कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस झील में पवित्र डुबकी लगाता है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इसके अलावा, यहां मान्‍यता है कि पुष्‍कर झील में स्‍नान करने से उस मनुष्‍य के सारे पाप धुल जाते हैं और कई प्रकार की त्‍वचा सम्‍बधी रोग भी दूर हो जाते हैं। इस झील के तट पर एक शानदार महल बना हुआ है यह आमेर के राजा मान सिह के द्वारा बनाया गया था लेकिन अब यह लोगो के लिए होटल बना दिया गया है। आप कढ़ाई के कपड़े, जूते, चूड़ियाँ, पीतल के बर्तन, रंगीन सैडल और दीवार के पर्दे पुष्कर के मुख्य बाजार में स्टालों से खरीदारी कर सकते हैं।

पुष्कर झील

जयपुर से 3-4 घंटे की ड्राइव के अंदर

हिण्डौन सिटी

हिंडौन सिटी जयपुर से 160 किमी की दुरी पर स्थित है NH11 के माध्यम से जयपुर से रामगढ़ और दौसा होते हुए 3 घण्टे का समय लगता है। प्राचीनकाल में हिण्डौन शहर मत्स्य के अंतर्गत आता था। मत्स्य शासन के दौरान बनाए गई प्राचीन इमारतें आज भी मौजूद हैं। यह शहर राजस्थान के करौली-धौलपुर लोकसभा क्षेत्र में आता है एवं इस शहर का विधान सभा क्षेत्र हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र(राजस्थान) लगता है। यहाँ पर हिरण्यकश्यप और प्रहलाद की पौराणिक कथा के जुड़े होने का विश्वास है। नरसिंह जी मंदिर नरसिम्हा, भगवान विष्णु, जिन्होंने हिरण्यकश्यप को मार डाला था उनका अवतार ये सब यहां हुआ है इन सभी सब जगहों को आप यहां आकर देख सकते है।

Narsimha, an incarnation of Lord Vishnu killing Hiranyakashyap

यहां पर कुछ अन्य आकर्षक देखने योग्य स्थान जैसे  देव नारायण मंदिर, श्री महावीर जी मंदिर है, जो एक जैन तीर्थ स्थल है, प्रहलाद कुंड, सागर बांध और नेहरू पार्क आदि भी शामिल हैं।

Shri Mahavir Ji Temple

अलवर

अलवर जयपुर शहर से 163 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर पहुँचने के लिए 3 घण्टे का समय लगता है अलवर एक ऐतिहासिक स्थल है। इसको एक बार राजपूत रियासत के कछावा राजपूत शासन की राजधानी बनाया था। अलवर किला और बल किला का निर्माण मुगल साम्राज्य के उदय से पहले किया गया था। 18 वीं सदी में यहां का सिटी पैलेस भी विनय विलास महल के रूप में जाना जाता था। यहां की वास्तुकला में मुगल शैली और राजपूत शैली का मिश्रण है।  महल के बाहर बस बंगाली छत और मेहराब के साथ एक अद्भुत कब्र निहित है इसको मूसी महारानी की छतरी की छत कहते है। यहां पर फतेह जंग का मकबरे का भी ऐतिहासिक महत्व है।

Vinay Vilas Palace – the City Palace of Alwar

इसके आलावा अलवर एक ऐतिहासिक  समृद्ध प्राकृतिक विरासत के है यहां पर शांत झीलों, सुंदर घाटियों, उद्यान और वनस्पतियों जीवो की बेहतरीन किस्मे देखने को मिलती है। यहां पर देखने लायक जगह है फतहगंज गुम्बद, पुर्जन विहार, कम्पनी बाग, सिटी पैलेस, विजय मंदिर झील महल, बाला किला, जय समन्द झील, सिलीसेढ झील और यहां पर जैन तीर्थंकरों और राजकीय संग्रहालय है जो 18 वीं और 19 वीं शताब्दी के मुगल और राजपूत चित्रो के बेहतरीन सग्रह देखने को मिलते है। संग्रहालय भी भारतीय शस्त्रागार से संग्रह रखती है।

मंडावा

मंडावा जयपुर से 169 किमी की दुरी पर स्थित है मंडावा शेखावाटी क्षेत्र में स्थित है यहां पर जाने में आगरा-बीकानेर सड़क के माध्यम से 3 घण्टे 5 मिनट का समय लगता है। यह अपने शानदार किलों और हवेलियों के लिए जाना जाता है। यहां के महलो और हवेलियों में कला भित्ति चतरो को ऊपर की तरफ उकेरा हुआ बनाया गया है जो इसे देखने के लिए आगन्तुको को आकर्षित करती है। मंडावा किला, गोयनका डबल हवेली हाथी और घोड़ों के साथ सजी, भगवान कृष्ण, झुनझुनवाला हवेली और गुलाब राय लाडिया हवेली के चित्रों के साथ मुरमुरा हवेली इस  जगह के प्रमुख आकर्षण का केंद्र हैं।

Beautiful wall murals on a Haveli in Mandawa

शहर में भगवान शिव और भगवान कृष्ण को समर्पित बहुत सारे मंदिर है। परंतु इन मंदिरों में सबसे सुंदर एक ठाकुरजी का मंदिर है।

भरतपुर

भरतपुर जयपुर से 187 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर पहुँचने के लिए  NH11 के माध्यम से 3 घण्टे 10 मिनट का समय लगता है। भरतपुर राजस्थान का एक प्रमुख शहर होने के साथ-साथ देश का सबसे प्रसिद्ध पक्षी उद्यान भी है। भरतपुर की गर्म जलवायु में सर्दियां बिताने प्रत्येक वर्ष साइबेरिया के दुर्लभ सारस यहाँ आते है। भरतपुर राष्ट्रीय उद्यान केवलादेव घना के नाम से भी जाना जाता है। यहां भारत के अन्य भागों से तो पक्षी आते ही हैं साथ ही यूरोप, साइबेरिया, चीन, तिब्बत आदि जगहों से भी प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। पक्षियों के अलावा सांभर, चीतल, नीलगाय आदि पशु भी यहां पाए जाते हैं। 15 वीं सदी में भरतपुर पैलेस, जो मुगल और राजपूत स्थापत्य शैलियों की एक संलयन है इसके शाही अतीत को दर्शाया गया था। 18 वी सदी में लोहागढ़ में अभेद्य किलो का निर्माण बड़े पैमाने पर किया गया था अग्रेजो द्वारा कई हमलो के बाद भी खुद को बचा लिया गया था।

Lohagarh Fort

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान दुनिया के बेहतरीन पक्षी अभयारण्यों में से एक है। एक बार भरतपुर के प्रधानों के द्वारा यहां शाही शिकार का आयोजन किया गया था। साथ ही यूरोप, साइबेरिया, चीन, तिब्बत आदि जगहों से भी प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। पक्षियों के अलावा सांभर, चीतल, नीलगाय आदि पशु भी यहां पाए जाते हैं। यह जगह पक्षी प्रमियों के लिए स्वर्ग है।

एक अन्य प्रमुख आकर्षण राजकीय संग्रहालय, जो कलाकृतियां, नक्काशीदार मूर्तियां और अन्य पुरातात्विक संसाधनों की एक अद्वितीय और समृद्ध संग्रह को दर्शाता है। मुगलों और अंग्रेजों पर अपनी जीत की याद में किले के अंदर जवाहर बुर्ज और फतेह बुर्ज बनवाए। भरतपुर से 34 किमी. उत्तर में डीग नामक बागों का खूबसूरत नगर है। शहर के मुख्य आकर्षणों में मनमोहक उद्यान, सुंदर फव्वार और भव्य जलमहल शामिल हैं। यह शहर बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान

रणथम्भोर राजस्थान का बहुत बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है । यह वन्यजीव अभ्यारण 392 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है । ये दक्षिण पूर्वी राजस्थान है जो जयपुर से 130 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर जिले में स्थित है । यह राष्ट्रीय उद्यान सूंदर गुलाबी नगर जयपुर के महाराजाओ के शिकारगाह के रूप में था । रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है । राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न जंगली जानवरों, सियार, चीते, हाइना, दलदल मगरमच्छ, जंगली सुअरों और हिरण की विभिन्न किस्में है । इसके आलावा वह जलीय वनसप्ति जीव भी है। यह इतनी आकर्षक जगह है जहाँ पर कई फोटोग्राफर और वन्यजीव प्रेमी आते है और अच्छे फोटो खींचते है ।

Tiger spotted at Ranthambore National Park

यह राष्ट्रीय उद्यान बड़े बाघों के लिए जाना जाता है यहाँ पर बड़े बाघ ज्यादा पाए जाते है । यहाँ पर पर्यटकों को कई तरह के जगली जानवरों को देखने का मौका मिलता है । ये जगह अपने 'टाइगर रिजर्व' के लिए प्रसिद्ध है और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, एक बहुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल के लिए दुनिया भर  में जाना जाता है। यह उद्यान अरावली रेंज और विंध्य पठार के बीच में स्थित है, जो की सवाई माधोपुर से 14 किलोमीटर की दूरी पर है। रणथम्भोर के पास में एक गांव है गांव के लोग जंगली जानवरों का शिकार करते थे । भारत सरकार ने इस उद्यान के लिए 60 स्क्वायर माइल्स जगह आवंटित की थी । ताकि जंगली जानवरों की सुरक्षा की जा सके ।

Jogi Mahal, Ranthambore

कोटा

हालांकि कोटा ने भारत के एक प्रतिष्ठित शैक्षिक शहर के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की है यह सप्ताह के अंत में घूमने जाने का एक बहुत अच्छा विकल्प है। यह जयपुर शहर से 253 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर जाने के लिए NH12 के माध्यम से 4 घण्टे का समय लगता है कोटा शहर चंबल नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है। यहां पर प्रभावशाली किलों, महल, मंदिर, बगीचे आदि देखने लायक जगह है जो कई सदियो पहले से बने हुए है। कोटा की वर्तमान इमारते भी देखने लायक है।

Replica of Egypt’s Pyramid at Seven Wonders Park, Kota

कुछ प्रमुख आकर्षण बृज राज भवन पैलेस, जग मंदिर के द्वीप महल किशोर सागर झील के बीच में निर्मित हैं।  केशर बाग का खूबसूरत प्राकृतिक  द्रश्य चंबल गार्डन, महाराव माधो सिंह संग्रहालय पुराने महल में स्थित है और कोटा बैराज जहां पर आप शाम को शेर करके सुखद जीवन का आनंद ले सकते है। कोटा में सात आश्चर्य पार्क है विश्व के सात आश्चर्यों की छोटी प्रकृति है यहां आप शाम को घूमने का अच्छा आनंद ले सकते हो।

Kota Barrage

मथुरा

भगवान कृष्ण की जन्म भूमि मथुरा जयपुर से 224 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पहुचने के लिए  NH11 के माध्यम से 4 घण्टे लगते है। इस प्राचीन शहर में विशेष रूप से भगवान कृष्ण के अनेको मंदिर है और तीर्थ स्थान है मथुरा एक प्रसिद्ध धार्मिक शहर है।  इस प्राचीन शहर में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र  कृष्ण जन्मभूमि मंदिर है इसलिए ये सबसे लोकप्रिय है और यहां पर बहुत सारे लोग आते है।  यह मंदिर वास्तव में जेल की कोठरी में जहां कृष्ण का जन्म हुआ था उस जगह पर बनाया गया है। यह 150 साल पुराना द्वारिकाधीश मंदिर है यहां पर द्वारका के राजा के रूप में कृष्ण को दर्शाया गया है।

Dwarkadhish Temple

अन्य आकर्षण का केंद्र जामा मस्जिद, जो 1662 ईस्वी में बनाया गया था। यहां पर राधाकुंड, कंस किला, विश्राम घाट, श्री जम्बू स्वामी निर्वाण स्थल दिगंबर जैन मंदिर,नाम योग साधना मंदिर और राजकीय संग्रहालय ये सब मथुरा में शामिल हैं। यहां का  एक जैन धार्मिक स्थल है। यहाँ पर आप जन्माष्टमी और होली के समय में मथुरा की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय है।

आगरा

जयपुर से आगरा मुगल शहर 240 किमी की दुरी पर स्थित है। यहां पर पहुँचने के लिए 4 घण्टे और 10 मिनट का समय लगेगा। अधिकांश लोग यहां पर आगरा का ताजमहल देखने के लिए आते है जो विश्व के सात आश्चर्यो में से एक है ताज महल की सुंदरता पर्यटको को अपनी और आकर्षित करती है। लेकिन शहर में इसके अलावा भी आगरा फोर्ट, उत्कृष्ट ताज संग्रहालय उस युग से कई मूल मुगल लघुचित्रों और अच्छी तरह से संरक्षित सोने और चांदी के सिक्के का प्रदर्शन करने के साथ ही अन्य सुंदर संरचनाओं की एक संख्या है। मेहताब बाग मूल रूप से सम्राट बाबर द्वारा बनाया गया, अकबर की समाधि, इतिमद-उद-दौला, स्वामी बाग और जामा मस्जिद है। 

Agra Fort

बस जामा मस्जिद के पीछे संकीर्ण, रंगीन बाजार की हलचल जालियो में देखने को मिलेगी। यह क्षेत्र में आमतौर पर किनारी बाजार के रूप में जाना जाता है और यहां पर कपड़े के जूते, संगमरमर का काम है, कपड़े, आदि की दुकान के लिए एक अच्छी जगह है

वृंदावन

वृंदावन जयपुर से 239 किमी की दुरी पर है आपको यहां पर पहुँचने के लिए  NH11 के माध्यम से 4 घण्टे और 25 मिनट का समय लगता है। यह एक तीर्थ स्थल है और यह यमुना  किनारे पर स्थित है यमुना वह जगह है जहां पर भगवान कृष्ण पले बड़े थे। इसके अलावा, इस शहर में भगवान कृष्ण और उनकी प्रेमिका राधा के बीच दिव्य प्रेम का होने का साक्षी भी माना जाता है।

Idol at Banke Bihari Temple

वृंदावन में धूमने पर चारो तरफ सड़को पर हलचल रहती है और बिंदीदार, 'राधे-राधे' अगरबत्ती और फूल और दिव्य वातावरण की गंध की आवाज गूंज, यह सब देख कर एक बार में ही पुरे जीवन का अनुभव मिलता है इस जगह के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक बांके बिहारी का मंदिर है। सेवा कुंज और निधिवन दो महत्वपूर्ण उद्यान क्षेत्र है यहा पर कृष्ण गोपियों के साथ रासलीला का प्रदर्शन किया करते थे यहा पर राधा-कृष्ण एक साथ विश्राम किया करते थे ऐसा माना जाता था पास में ही गोवर्धन पर्वत है जो बहुत अच्छी घुमने कि जगह है इसको कृष्ण भगवान ने अपनी उगली के ऊपर उठा लिया था |

Seva Kunj, Vrindavan

प्रेम मंदिर (प्यार का मंदिर), इस्कॉन मंदिर, केशी घाट, जुगल किशोर मंदिर, श्री रंगनाथ या रंगजी मंदिर (जो उत्तरी भारत में सबसे बड़ी मंदिरों में से एक है), राधा रमण मंदिर और श्री गोपेश्वर महादेव मंदिर अन्य उल्लेखनीय आकर्षण हैं। लोई बाजार उचित मूल्य पर सुंदर हस्तशिल्प, कपड़े, प्राचीन वस्तुओं और लकड़ी के काम किये हुए सामान खरीदने के लिए एक अच्छी जगह है। ध्यान दें कि यह बुधवार को बंद रहता है। आप  खादी भवन से खादी कपड़े खरीद सकते हैं।

पाली

पाली जयपुर से 302 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर पहुँचने के लिए 4 घण्टे और 25 मिनट का समय लगता है। पाली एक विलक्षण शहर है यहां पर एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शांत पवित्रता जगह है। पाली में पालीवाल ब्राह्मण है जो कई सालो से यहां पर बसे है और धनी कबीले के है इसलिए इनको पालीवल ब्राह्मण कहते है। यह जगह यहाँ अपनी शानदार हवेलियों के माध्यम से रॉयल राजस्थान की सदियों पुरानी आकर्षण और बोरिस  (बावड़ी) के बड़ी संख्या में उपस्थित को दर्शाता है।

Intricate architecture of Ranakpur Jain Temples, Pali

इस जगह पर एक प्रसिद्ध जैन मंदिर है जो जैन समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है । यहा पर जटिल स्थापत्य शैली प्रशंसित है 15 वीं सदी में राणा कुंभा के शासनकाल के दौरान सन 1439 इस्वी में इस मंदिर कि स्थापना कि गई थी पाली के कुछ अन्य लोकप्रिय आकर्षण जवाई बांध, निम्बो का नाथ, पाली राष्ट्रीय उद्यान, श्री हतुन्दी राटा महावीर जैन तीर्थ और लखोटिया उद्यान शामिल हैं।

चित्तौड़गढ़

चितौड़गढ़ शहर वीरता और बलिदान का प्रतीक है, यह जयपुर से 310 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर पहुँचने के लिए 4 घण्टे और 50 मिनट का समय लगेगा। शहर के भव्य किले, यहां की शानदार छतरियों और आँखों को भव्य लगने वाले  गौरवशाली शाही महलो के किस्से अतीत के बारे में बोलते है।

चित्तौड़गढ़ का किले 7 वीं शताब्दी में बनाया गया था और यह एक विशाल संरचना है। यहां पर पैदल पोल, भैरों पोल, हनुमान पोल और राम पोल सहित कई प्रवेश द्वार है। किले में अनेक प्रभावशाली छतरियों और प्राचीन खंडहर राजपूत वीरता की याद दिलाती है। यहां पर एकांत में समय बिताने के लिए बहुत अच्छी जगह है। इस के अलावा किले में  एक ध्वनि और प्रकाश शो हर शाम आयोजित होता है।

Chittorgarh Fort – the indomitable pride of Chittaur

विजय स्तम्भ या विजय टॉवर 37 मीटर लम्बा है और 9 मंजिल का है इसके ऊपर रामायण और महाभारत के प्रकरणों को दर्शाया गया है।  महाराणा कुंभा ने मालवा और गुजरात के मुस्लिम शासकों पर उनकी जीत का जश्न मनाने के लिए 1440 ईस्वी में इसे बनाया। कीर्ति स्तम्भ भी एक प्रसिद्ध टावर है जो 22 मीटर का है यह स्तम्भ पहले जैन तीर्थंकर आदिनाथ जी को समर्पित है।

चित्तौड़गढ़ के अन्य आकर्षण राणा कुंभा महल, पद्मिनी महल, कुंभा श्याम मंदिर, कालिका माता मंदिर, शानदार फतेह प्रकाश पैलेस जो अब ठीक एक राजकीय संग्रहालय है, गौमुख जलाशय, मीरा मंदिर है, जहां मीरा की पूजा भी होती है क्योकि उन्होंने भगवान कृष्ण की खूब ज्यादा वहां पर भक्ति की थी  और महाआरती भी शामिल हैं।

Meera Temple – where Meera worshipped Lord Krishna

सबसे अच्छा समय चित्तौड़गढ़ यात्रा करने के लिए फरवरी से मार्च तक और फिर सितंबर से दिसंबर तक है। आप एक दिन चितौड़ की यात्रा कीजिये यह पर्यटको के आकर्षण का केंद्र है। आप यहां पर सभी पर्यटक स्थलों को देखना चाहते है तो आप को यहां पर सप्ताह के अंत में आना चाहिए।

जयपुर से 5-6 घंटे की ड्राइव के अंदर

बीकानेर

बीकानेर ऊंट सवारी के लिए सबसे अच्छा शहर है बीकानेर जयपुर से 335 किमी की दुरी पर स्थित है। यहां पर पहुँचने के लिए आपको NH11 के माध्यम से 5 घण्टे का समय लगेगा। इस रेगिस्तानी शहर में आपको सप्ताह के अंत में घूमने के लिए आना चाहिए। यह शहर रेत के टीलों से घिरा हुआ है शहर में शानदार किलों और महलों लाल-गुलाबी बलुआ पत्थर में बनाया गया है जो अपने समृद्ध इतिहास का प्रदर्शन करता है।

Junagarh Fort

जूनागढ़ किला 1588 ईस्वी में बनाया गया था इसके अंदर कुछ खूबसूरत महलों घरों, सूरज पोल जो किले के मुख्य प्रवेश द्वार पर है, सुंदर चन्द्र महल अद्भुत चित्रों, अनूप महल, रंग महल, हर मंदिर देखने के लिए उल्लेखनीय जगहों के साथ सजा हुआ है।  सादुल संग्रहालय लालगढ़ पैलेस की पहली मंजिल पर है  और बीकानेर के 3 लगातार महाराजाओं के समय को प्रदर्शित करता है। अन्य उल्लेखनीय जगह जैसे रामपुरिया हवेलियों, भांडासर जैन मंदिर सुमतिनाथ जी और देवी कुंड सागर कि बीकानेर के शाही परिवार की शाही स्मारकों मेजबान के लिए समर्पित हैं।

The Royal Cenotaphs at Devi Kund Sagar, Bikaner

बीकानेर हवेलियों, महलों, मंदिरों, संग्रहालयों, रंगीन बाजारों और उसके हंसमुख लोगों को एक साथ यह जयपुर के सप्ताह अंत में घूमने जाने के लिए सबसे अच्छी जगह है।

दिल्ली

राजधानी दिल्ली जयपुर से 272 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर पहुँचने के लिए  NH8 के माध्यम से 5 घण्टे और 20 मिनट का समय लगता है यह निस्संदेह जयपुर सप्ताह के अंत में घूमने जाने के लिए सबसे अच्छी जगह में से एक है। एक वाणिज्यिक महानगर के रूप में विकसित होने के बावजूद, दिल्ली शहर ने अच्छी तरह से अपनी ऐतिहासिक जड़ों को संरक्षित रखा  है। इंडिया गेट, लाल किला, संसद भवन, कमल मंदिर, कुतुब मीनार, जंतर मंतर, हुमायूं का मकबरा इसकी प्रमुख ऐतिहासिक संरचनाओं में से कुछ हैं।

Jantar Mantar

यहां पर सड़क के किनारे लगी थड़ी के साथ-साथ भव्य होटल भी है जहां पर परिवार के लोग या जोड़े भी खाना खाने जा सकते है। कनॉट प्लेस, अक्षरधाम मंदिर, गुरुद्वारा बंगला साहिब, जामा मस्जिद, इस्कॉन मंदिर, गांधी स्मृति, राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली, राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर, अग्रसेन की बावली और दिल्ली हाट का पता लगाने के लिए कुछ अन्य स्थान भी है।

Akshardham Temple

उदयपुर

राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर शहर जयपुर से 395 किमी की दुरी पर स्थित है यहां पर पहुँचने के लिए NH8 के माध्यम से 5 घण्टे और 54 मिनट का समय लगता है। उदयपुर, कथा महलों, बगीचों, खूबसूरत नीला झीलों की भूमि और मेवाड़ के समृद्ध इतिहास का गहना है। जयपुर में सप्ताह के अंत में घूमने की अच्छी जगहों में से एक है।  छात्रों, युगल, विरासत प्रेमियों, कवियों, चित्रकारों, लेखकों, प्रकृति प्रेमियों और जो शांत झीलों के साथ-साथ उनकी शाम बिताने का सबसे अच्छा स्थान है उदयपुर शहर यहां पर सभी उम्र के लोग आते है और लोगो को यहां पर समय बिताना बहुत अच्छा लगता है।

जग निवास उदयपुर

सिटी पैलेस में एक राजसी वास्तुकला जैसे आंगनों, मंडप छतों और उद्यान फांसी युक्त सब चमत्कारिक है। पिछोला झील पहाड़ियों और दिप महलो जग मंदिर (लएक गार्डन पैलेस) जग निवास (लेक पैलेस) झीलों से घिरा बेजोड़ भव्यता की एक दृष्टि प्रदान करता है। अन्य देखने लायक जगह जगदीश मंदिर 1651 ईस्वी में बनायासहेलियों की बारी में इंडो-आर्यन शैली में बनाया गया है छोटे सजावटी बगीचे है जहां पर शाही महिलएं चहलकदमी के लिए आया करती थी। फतेह सागर झील, प्रताप मेमोरियल राजपूत नायक महाराणा प्रताप, मानसून पैलेस, गुलाब बाग और शिव निवास पैलेस आदि स्मारक भी शामिल है

यहां पर और भी बहुत सारे स्थल है जहां पर आप सप्ताह के अंत में घूमने का कार्यक्रम बना सकते है। तो आप किसका इंतजार कर रहे है इन स्थलों पर घूमने के लिए अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यो के साथ आइये और यहां की ऐतिहासिक चीजो को देखने का मजा लीजिये। आप सप्ताह के अंत में जयपुर से दूर जाने की योजना बनाइये।

हमारे साथ अपने अनुभवों को साझा करना मत भूलना। हमने अपनी सूचि में कुछ सप्ताह के अंत में घूमने जाने वाले स्थानों की सूचि बनाई है वो आप देखिये और घूमने इन जगहों पर जाइये।

 


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